जो काम होश मे करने की हिंमत नहीं हो ती है वोह काम लोग दारु के नसे मे बिंदास कसे कार लेते हे।


जो काम होश मे करने की हिंमत नहीं हो ती है वोह काम लोग दारु के नसे मे बिंदास कसे कार लेते हे।




जसे ही दारु का घुट लेते है तुरत ही काफी तेजी से दारु खून मे मिल जाती है। हमारे पेट मे 10% अल्कोहल को सोष लेता है, बाकी का छोटी आतड़ी मे जा ता है, ओर वहा रक्तनालिका मे चला जा ता है।








लीवर 15 मिलीग्राम तक का हर घंटे मेटब्लोइज़ कर सकता है। इसका अर्थ यह हुआ के सिर्फ ओर सिर्फ इतनी मात्रा की दारु का ही ऊर्जा मे रूपांतर  हो ता है। अगर कोई इस मात्रा से अधिक दारु पिता है तो उसको नशा चड़ने लगता है, ओर उसके संकेत दिखने लगते है।




लीवर के अंदर दारु ADH ओर ALDH यह 2 एंजयमस के जरेए मेटाब्लोइज़ हो ता है, सबसे पहले ADH के जरेए दारु मेटाब्लोइज़ हो ता है, जो दारू को ओसिटलडीहाइड मे बदल देता है। जो एक नशीला मिश्रण है,ओर उसकी वजह से सर दर्द हंगोवर जनाई देता हे।  



ओसिटलडीहाइड ALDH असर्टिक एसिड  यानि विनेगर मे मेटब्लोइज़ करता है।
2 ड्रिंक के बाद नशे के लक्षण दिखने लगते हे,ओर उस टाइम पर आप एसा करने लगते है जो सायद आप नशे मे ना होने पर आप नई कर सकते।




हमारे दिमाग मे गाबा न्यूरोन्स जिस को स्टॉप न्यूरोन्स भी बोल सकते है ओर दूसरे गो न्यूरोन्स भी होते है, ओर यही न्यूरोन्स ही हमसे कम करवा के लेते है, दारू ये दोनों किसम के न्यूरोन्स पर असर करता हे, जिसकी वजह से दिमाग बहोत से कार्य करना बंद कर देता है। इस मे से दिमाग का एक हिशा यानि प्रिफंटल कॉर्टैक्स जो दिमाग के आगे के भाग मे होता हे,जो की बहोत ही स्क्रीय होता हे सिर्फ दारू पीने के बाद ही उस पर असर होता हे।


दारू पीने के बाद कुछ लोगो को अछा लगता हे, उस का कारण यह है के दारू न्यूरोन्स को स्क्रीय कर देता हे, ओर उसिकी वजह से ही हमे अछा लगता हे,इसको डोपमिन फिल गुड न्यूरोट्रांसमीटर कहा जाता हे, इस  न्यूरोट्रांसमीटर  के कारण ही हमको दारू यानि की सराब पीने का बार बार मन होता हे।


3 से 4 ड्रिंक्स के बाद सरीर मे 50 मिलीग्राम तक का दारू जमा होता है ओर उसका नशा जो होता है वह संभाला नई जाता हे।
10 ड्रिंक के बाद उल्टी,बेचेनी लगना, कुछ याद न आना,सही से बोल न पाना, ओर हाइपरथेमीया यानि  सरीरिक तापमान 104 डेग्री के ऊपर तक जाना यह सब हो सकता है अधिक दारू पीने से।

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